| आज की तिथि | दशमी |
| वार | बुधवार |
| नक्षत्र | पूर्व फाल्गुनी तक 21:51 |
| ज्योतिष योग | ब्रह्मा |
| आज का करण | वश्ती |
| पक्ष | कृष्ण |
आने वाले त्योहारों और व्रतों की तैयारी पहले से करें — तिथि, पक्ष और तारीख के साथ।
राहुकाल पंचांग का एक अशुभ समय है, जो प्रतिदिन सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच आठवें भाग (लगभग 90 मिनट) के रूप में केवल एक बार आता है। दक्षिण भारत में इसे 'राहुकालम' कहते हैं। राहु ग्रह के दुष्प्रभाव से बने इस समय में नए कार्य या यात्रा टालनी चाहिए, हालांकि पूजा-पाठ व ध्यान के लिए यह समय शुभ है।
वैदिक ज्योतिष में राहुकाल की गणना एक खास पद्धति से की जाती है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के पूरे समय को आठ बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। इन्हीं आठ भागों में से एक भाग राहुकाल माना जाता है। सप्ताह के हर दिन के लिए यह भाग अलग तय किया गया है। इसी वजह से राहुकाल का समय रोज़ बदलता रहता है।
कई लोग सोचते हैं कि राहुकाल हमेशा एक ही समय पर होता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। सूर्योदय और सूर्यास्त के बदलने के साथ राहुकाल का समय भी बदलता रहता है। भारत के अलग-अलग शहरों में सूर्योदय का समय एक जैसा नहीं होता। कहीं सूरज जल्दी निकलता है तो कहीं देर से। इसलिए राहुकाल भी हर स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार राहुकाल का समय सप्ताह के हर दिन अलग माना जाता है। इसकी गणना सूर्योदय और दिनमान के आधार पर की जाती है। नीचे सामान्य रूप से राहुकाल के भाग बताए गए हैं:
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वार |
राहुकाल |
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रविवार |
दिनमान का 8वां भाग |
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सोमवार |
दूसरा भाग |
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मंगलवार |
सातवां भाग |
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बुधवार |
पांचवां भाग |
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गुरुवार |
छठा भाग |
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शुक्रवार |
चौथा भाग |
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शनिवार |
तीसरा भाग |
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में शादी-विवाह, नया व्यापार, निवेश, यात्रा की शुरुआत और बड़े फैसले लेने से बचना बेहतर माना जाता है। राहुकाल को सावधानी वाला समय माना जाता है, लेकिन सही उपाय और पूजा-पाठ से इसका प्रभाव काफी हद तक शांत किया जा सकता है।
वैदिक ज्योतिष में राहुकाल का समय, नए और मांगलिक कार्यों के लिए अच्छा नहीं माना जाता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस दौरान कुछ भी नहीं किया जा सकता। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में कुछ ख़ास उपाय और धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
1. भगवान शिव की पूजा करें: राहुकाल में भगवान शिव की पूजा और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे राहु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
2. राहु मंत्र का जाप करें: इस समय राहु मंत्र - “ॐ रां राहवे नमः” मंत्र का जाप करना अच्छा माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार इससे राहु ग्रह शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
3. ध्यान और साधना करें: राहुकाल के दौरान ध्यान, मेडिटेशन और आध्यात्मिक साधना करना लाभकारी माना गया है। इससे मन शांत रहता है और तनाव कम होता है।
4. दान-पुण्य करें: जरूरतमंदों को काले तिल, सरसों का तेल, उड़द दाल या नीले वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है। कई लोग इस समय पक्षियों और जानवरों को भोजन भी कराते हैं।
5. पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करें: हालांकि नए शुभ काम शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन पूजा, मंत्र जाप, हवन और धार्मिक पाठ करना राहुकाल में अच्छा माना गया है।
A. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु काल दिन का वह अशुभ समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए पूरी तरह वर्जित माना जाता है।
A. व्यक्ति के जीवन में अचानक मानसिक तनाव, अप्रत्याशित आर्थिक नुकसान, बनता हुआ काम बिगड़ना, और भ्रम की स्थिति पैदा होने लगती है।
A. हां, राहुकाल में पूजा, मंत्र जाप, ध्यान और धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।
A.सामान्य रूप से राहुकाल लगभग 90 मिनट का माना जाता है, हालांकि स्थान और सूर्योदय के समय के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।