कल का पंचांग (Kal Ka Panchang)

New Delhi, Delhi, Indiaगुरुवार, 5 नवंबर 2026

आज का पंचांग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण

आज की तिथिएकादशी
वारगुरुवार
नक्षत्रउत्तर फाल्गुनी तक 22:18
ज्योतिष योगवैधृति
आज का करणबालाव
पक्षकृष्ण

मास, संवत और ऋतू

ऋतुशरद
शक संवत1948 विश्वावसु
विक्रम संवत2083 विश्वावसु
अयनदक्षिणायन
अमांतआश्विन
पूर्णिमांतकार्तिक
☀️

सूर्योदय

01:05 am
🌅

सूर्यास्त

12:03 pm
🌕

चंद्रोदय

09:13 pm
🌑

चंद्रास्त

09:33 am

अशुभ समय (अशुभ मुहूर्त)

कंटक / मृत्युसे05-11-26 01:26:41 PMतक05-11-26 02:48:51 PM
राहु कालसे05-11-26 01:26:41 PMतक05-11-26 02:48:51 PM
कालवेला / अर्धयामसे05-11-26 02:48:51 PMतक05-11-26 04:11:01 PM
यमघंटासे05-11-26 06:35:50 AMतक05-11-26 07:58:00 AM
यमगंडसे05-11-26 06:35:50 AMतक05-11-26 07:58:00 AM
Gulika Kaalसे05-11-26 09:20:10 AMतक05-11-26 10:42:20 AM

चंद्र बल और तारा बल

चंद्र बलमेष, मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, धनु, कुम्भ, मीन
तारा बलअश्विनी, कृतिका, आद्र, पुष्या, माघ, उत्तर फाल्गुनी, स्वाति, अनुरुद्ध, मुला, उत्तरा अशधा, शताभिशा, उत्तर भद्रपद

चंद्र और सूर्य राशि

चंद्र राशिसिंहतक 04:05
सूर्य राशितुला

ग्रहों की स्थिति

PlanetsRashiLongitudeनक्षत्रPada
AscendantLibra17°21′41″Swati4
SUNLibra18°23′32″Swati4
MOONLeo28°21′26″Uttara Phalguni1
MERCURYLibra17°22′0″Swati4
VENUSLibra0°16′1″Chitra3
MARSCancer26°23′50″Ashlesha3
JUPITERLeo0°33′40″Magha1
SATURNPisces14°48′24″Uttara Bhadrapada4
RAHUAquarius1°37′29″Dhanishta3
KETULeo1°37′29″Magha1

आज और आगामी त्योहार

आने वाले त्योहारों और व्रतों की तैयारी पहले से करें — तिथि, पक्ष और तारीख के साथ।

पंचांग में सिर्फ कल का पंचांग तिथि ही नहीं, बल्कि सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, चंद्रास्त, राहुकाल, दिशाशूल और ग्रहों की स्थिति जैसी जानकारियां भी दी जाती हैं। इसलिए आज भी कई लोग जरूरी काम से पहले पंचांग देखकर ही दिन की शुरुआत करते हैं। ‘पंचांग’ शब्द का मतलब होता है- पांच अंग। इसमें आज की तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को मुख्य माना गया है। यही पाँच चीजें मिलकर पंचांग बनाती हैं। हिंदू पंचांग की गणना प्राचीन वैदिक पद्धति के अनुसार की जाती है और इसका संबंध विक्रम संवत से माना जाता है।

भारत और नेपाल के कई हिस्सों में आज भी दैनिक पंचांग का विशेष महत्व है। धार्मिक त्योहार, व्रत, शुभ मुहूर्त और मांगलिक कार्यों की तारीख तय करने में पंचांग की अहम भूमिका मानी जाती है। यही कारण है कि लोग रोज़ कल का पंचांग (kal ka panchang), कल कौन सी तिथि है और चौघड़िया की जानकारी जरूर देखते हैं।

कल का पंचांग कैसे शुभ समय बताता है?

अगर आप जानना चाहते हैं कि किसी काम की शुरुआत के लिए सही समय कौन सा है, तो कल का पंचांग इसमें आपकी काफी मदद कर सकता है। पंचांग केवल तिथि और वार नहीं बताता, बल्कि यह भी संकेत देता है कि दिन का कौन सा समय शुभ रहेगा और किस समय थोड़ा संभलकर काम करना चाहिए।

दरअसल, पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर पूरे दिन की स्थिति बताई जाती है। इसी से यह समझ आता है कि कौन सा समय नए काम, पूजा-पाठ, यात्रा, खरीदारी या जरूरी फैसलों के लिए अच्छा माना जा रहा है। वहीं राहुकाल, गुलिक काल और अशुभ समय की जानकारी भी पंचांग से ही मिलता है, ताकि लोग जरूरी काम सही समय पर कर सकें। यदि आप ज्योतिष को ज्यादा नहीं जानते, तब भी पंचांग को आसानी से समझा जा सकता है।

जैसे लोग बाहर निकलने से पहले मौसम का हाल देखते हैं, वैसे ही कई लोग कल की तिथि और वार, शुभ मुहूर्त और दिन का अच्छा समय देख लेते हैं। धीरे-धीरे जब आप रोज़ कल का पंचांग देखना शुरू करते हैं, तो आपको यह समझ आने लगता है कि किस समय किए गए कामों में सफलता ज्यादा मिलती है और किन समय में रुकावटें आ सकती हैं। आसान शब्दों में कहें तो पंचांग पूरे दिन की दिशा बताता है, जबकि मुहूर्त उस दिन का सबसे शुभ और सही समय चुनने में मदद करता है।

किन पाँच आधारों से तय होता है कल का पंचांग?

हिंदू पंचांग को सिर्फ कैलेंडर नहीं, बल्कि समय और ग्रहों की स्थिति समझने का वैदिक तरीका माना जाता है। आइए जानते हैं पंचांग के इन पांच महत्वपूर्ण अंगों के बारे में।

नक्षत्र

पंचांग का पहला और बेहद महत्वपूर्ण अंग नक्षत्र माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं, जबकि मुहूर्त निकालते समय अभिजीत को मिलाकर 28 नक्षत्र माने जाते हैं। मान्यता है कि हर नक्षत्र का अपना अलग प्रभाव होता है। शादी-विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, शिक्षा शुरू करना या नया काम आरंभ करने से पहले नक्षत्र जरूर देखा जाता है। माना जाता है कि सही नक्षत्र में किया गया काम लंबे समय तक शुभ फल देता है।

तिथि

तिथि पंचांग का दूसरा प्रमुख अंग है। चंद्रमा की स्थिति के आधार पर तिथि तय होती है। हिंदू पंचांग में कुल 16 मुख्य तिथियां मानी गई हैं, जिनमें अमावस्या और पूर्णिमा सबसे विशेष मानी जाती हैं। एक महीने को दो पक्षों, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में बांटा गया है। अमावस्या से पूर्णिमा तक का समय शुक्ल पक्ष कहलाता है, जबकि पूर्णिमा से अमावस्या तक का समय कृष्ण पक्ष माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शुक्ल पक्ष में चंद्रमा की रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, इसलिए शादी-विवाह और बड़े शुभ काम इसी समय करना अच्छा माना जाता है। वहीं कृष्ण पक्ष में कुछ कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

योग

पंचांग का तीसरा अंग योग कहलाता है। ज्योतिष के अनुसार योग व्यक्ति के जीवन, स्वभाव और कार्यों पर प्रभाव डालते हैं। पंचांग में कुल 27 योग बताए गए हैं। इनमें विष्कम्भ, सिद्धि, ध्रुव, वरीयान, परिधि और व्याघात जैसे कई योग शामिल हैं। कुछ योग शुभ माने जाते हैं, जबकि कुछ योगों में शुभ कार्य करने व बड़े फैसले लेने की मनाही होती है। मुहूर्त निकालते समय योग का विशेष ध्यान रखा जाता है।

करण

करण पंचांग का चौथा मुख्य अंग है। आसान भाषा में समझें तो एक तिथि के आधे हिस्से को करण कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में कुल 11 करण बताए गए हैं। इनमें 4 स्थिर करण होते हैं, जबकि 7 करण बदलते रहते हैं। बव, बालव, तैतिल, वणिज और नाग करण प्रमुख माने जाते हैं। माना जाता है कि अलग-अलग करण का असर व्यक्ति के काम और निर्णयों पर पड़ता है।

वार

पंचांग का पांचवां प्रमुख अंग वार है। एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय को वार कहा जाता है। पूरे सप्ताह में सात वार होते हैं- रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार।

हर वार का संबंध किसी न किसी ग्रह और देवी-देवता से माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को अधिक शुभ माना जाता है। यही वजह है कि लोग पूजा, यात्रा, खरीदारी या नए काम की शुरुआत करते समय वार का भी ध्यान रखते हैं।

पंचांग के लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम भी पंचांग का श्रवण करते थे। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि जो व्यक्ति रोज़ पंचांग पढ़ता या सुनता है, उसे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल प्राप्त होते हैं। आइए जानते हैं पंचांग पढ़ने और सुनने के क्या-क्या लाभ बताए गए हैं।

  • मान्यता है कि रोज़ पंचांग देखने से व्यक्ति सही समय पर सही निर्णय लेना सीखता है। इससे कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है।
  • शास्त्रों के अनुसार तिथि का पठन-पाठन और श्रवण करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और धन का आशीर्वाद बना रहता है।
  • धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक वार का पाठ और सुनने से व्यक्ति की आयु बढ़ती है और जीवन में स्थिरता आती है। यही वजह है कि कई लोग रोज़ वार और पंचांग जरूर देखते हैं।
  • कहा जाता है कि नक्षत्रों का ज्ञान और उनका श्रवण व्यक्ति के पापों और नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक माना जाता है। 
  • ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, योग का पठन-पाठन करने से प्रियजनों का साथ बना रहता है। माना जाता है कि इससे रिश्तों में प्रेम, अपनापन और सामंजस्य बढ़ता है।
  • पंचांग व्यक्ति को यह समझने में मदद करता है कि कौन सा समय शुभ है और किस समय सावधानी रखनी चाहिए। इसी कारण लोग शादी, यात्रा, पूजा या नए काम से पहले पंचांग जरूर देखते हैं।

अलग क्षेत्रों में अलग पंचांग की परंपरा

भारत के अलग-अलग हिस्सों में पंचांग देखने और उसकी गणना करने का तरीका थोड़ा अलग माना जाता है। यही वजह है कि कई बार उत्तर भारत और दक्षिण भारत के पंचांग में महीनों की शुरुआत या समाप्ति में अंतर दिखाई देता है। हालांकि दोनों ही पंचांग वैदिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं और दोनों का महत्व समान माना जाता है।

उत्तर भारत में ज्यादातर “पूर्णिमांत पंचांग” का पालन किया जाता है। इसमें महीने का अंत पूर्णिमा के दिन माना जाता है। वहीं दक्षिण भारत में “अमांत पंचांग” अधिक प्रचलित है, जहां महीना अमावस्या पर समाप्त माना जाता है। इसी कारण कुछ त्योहारों, व्रतों या तिथियों की गणना में हल्का अंतर देखने को मिल सकता है। हालांकि पूजा-पाठ, शुभ मुहूर्त और धार्मिक मान्यताओं का उद्देश्य दोनों पंचांगों में एक जैसा ही रहता है। ज्योतिष के जानकार मानते हैं कि व्यक्ति को अपने क्षेत्र और परंपरा के अनुसार पंचांग देखना चाहिए, ताकि तिथि, वार और मुहूर्त की सही जानकारी मिल सके।

हिंदू परंपरा में किसी भी नए या मांगलिक कार्य की शुरुआत से पहले कल का पंचांग (kal ka panchang) देखकर आने वाले दिन की ज्योतिषीय स्थिति को समझना बेहद स्वाभाविक माना जाता है। चाहे गृह प्रवेश हो, विवाह, व्यापार की शुरुआत या फिर कोई महत्वपूर्ण यात्रा, लोग अक्सर एक दिन पहले ही यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि आने वाला दिन कैसा रहेगा और उस दिन कौन सी तिथि या वार पड़ने वाला है। पहले से यह जानकारी होने पर किसी भी शुभ कार्य की रूपरेखा बनाना काफी आसान हो जाता है।

दरअसल, यह पारंपरिक गणना सिर्फ एक तारीख बताने वाला माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे दिन को प्रकृति की सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ने वाला एक वैदिक मार्गदर्शक है। इसके जरिए हमें आने वाले दिन की तिथि, नक्षत्र, योग और करण की सटीक स्थिति का पता चलता है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कल का पंचांग देखना क्यों जरूरी है?

कल का पंचांग देखने से आपको आने वाले कल की तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति की जानकारी पहले से मिल जाती है। इससे आप अपने महत्वपूर्ण कामों, यात्राओं और मांगलिक कार्यों की योजना पहले से ही शुभ समय के अनुसार बना सकते हैं।

पंचांग में 'कल की तिथि' की गणना कैसे की जाती है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, तिथि की गणना चंद्रमा की कलाओं और सूर्य व चंद्रमा के बीच की दूरी के आधार पर होती है। पंचांग में कुल 30 तिथियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में बंटी होती हैं। सूर्योदय के समय जो तिथि मौजूद होती है, उसे ही उस दिन की मुख्य तिथि माना जाता है।

क्या अलग-अलग शहरों के लिए कल का पंचांग बदल जाता है?

हाँ, अलग-अलग शहरों के भौगोलिक स्थान के कारण वहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त का समय अलग होता है। चूंकि पंचांग की पूरी गणना (जैसे राहुकाल और शुभ मुहूर्त) सूर्योदय पर ही आधारित होती है, इसलिए सटीक जानकारी के लिए हमेशा अपने स्थानीय शहर का चयन करके ही पंचांग देखना चाहिए।

पंचांग के अनुसार कल के दिन की योजना बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

कल की योजना बनाते समय पंचांग में मुख्य रूप से दो बातें देखनी चाहिए। पहली — कल का अभिजीत मुहूर्त या शुभ चौघड़िया, जो नया काम शुरू करने के लिए उत्तम होता है। दूसरी—कल का राहुकाल, जो कि एक अशुभ समय है और इस दौरान नए या मांगलिक कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए।